Simple Lore

manju kala

रौलां गैरा और मैं

आ..!!आ!!मेरे बचपन.. आ…!लौट.. के फिर से ..आ!! इक्कीसवीं सदी का मध्यकाल.. हैरान… परेशान…. दौड़ती दुनिया… ..,थककर बैठी हूँ…. नदी के धारे पर…और …मुस्कुरा रही….हूँ नन्ही ओडिसी नृत्यांगनाओ की..मासूम अठखेलियाँ देखकर… जितनी चपलता से ये नृत्य करती हैं… उतनी ही तत्परता से ये सब वनिताएं डाक्टर और इंजीनियर बनने की होड़ में भी शामिल है..इनकी जिंदगी …

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